Thursday, October 15, 2009

मिर्च-मसाला के रंग


कविता जिंदल और चेतन के संग

सफल गज़ल गायक जगजीत

सिंहजगजीत सिंह का जन्म 8 फरवरी 1941 को राजस्थान के गंगानगर जिले में हुआ। इनके पिता का अमर सिंह और माता का नाम बच्चन कौर हैं। वह अपने परिवार में जीत के नाम से जाने जाते हैं। गज़ल गायक ने शुरुवाती दौर में अपनी पत्नी चित्रा सिंह के साथ गज़ले गई। जगजीत सिंह को पंजाबी, हिन्दी, उर्दू, बंगाली, गुजराती और नेपाली भाषाओं में गजलें गायी। जगजीत सिंह ने सर्वप्रथम गुजराती फिल्म में गीत गाए। श्री सुरेश अमीन ने जगजीत सिंह के करिअर बनाने में बड़ा योगदान दिया। सुरेश की मृत्यु के बाद उन्होने सुरेश को समर्पित ÷चिट्ठी ना कोई संदेश गज़ल गायी। शिक्षाः जगजीत सिंह ने 2 साल तक छगनलाल शर्मा से संगीत सीखा। इसके बाद 6 साल पक इन्होंने खयाल, ठुमरी, ध्रपुद व भारतीस संगीत में शिक्षा प्राप्त की। शिक्षा के लिए ये गंगानगर से जलांधर और फिर कुरुक्षेत्र चले गए। जलांधर के डी. ए. वी. कॉलेज से स्नातक तक की शिक्षा प्राप्त की और कुरुक्षेत्र विश्वविघालय से इतिहास में ए.म की। गज़ल एलबमः मील का पत्थर, ए. मेरे दिल, मिर्जा गालिब, आदमी, खोज, अपनी पंसद, सिलसिले, जजबात, इन्ताह, चेहरा, आइना, दिल कही होश कही, शहर इनकी प्रमुख एलबम हैं। इसके अलावा जगजीत सिंह ने कई भजन व गुरबानी गायी।फिल्मी करिअरः उन्होने प्रेम गीत, आशियाना, दुशमन, सरफरोश, तुम बिन, तरकीब, बाबुल आदि फिल्मों में गजले गाई।2003 में इन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया साथ ही साथ भारत सरकार ने संगीत के लिए उन्हें तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित किया। जगजीत सिंह ने अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा लिखी कविताओं को भी गज़ल के माध्यम से गाया। वह ऐसे पहले भारतीय संगीतकार है जिन्होंने भारतीय संगीत के इतिहास में पहली बार डिजिटल मल्टी ट्रैक रिकाडिंग का उपयोग किया। उन्हे इस समय का सबसे सफल गज़ल गायक माना जाता हैं। कविता जिंदल और चेतन के संग सफल गज़ल गायक जगजीत सिंहजगजीत सिंह का जन्म 8 फरवरी 1941 को राजस्थान के गंगानगर जिले में हुआ। इनके पिता का अमर सिंह और माता का नाम बच्चन कौर हैं। वह अपने परिवार में जीत के नाम से जाने जाते हैं। गज़ल गायक ने शुरुवाती दौर में अपनी पत्नी चित्रा सिंह के साथ गज़ले गई। जगजीत सिंह को पंजाबी, हिन्दी, उर्दू, बंगाली, गुजराती और नेपाली भाषाओं में गजलें गायी। जगजीत सिंह ने सर्वप्रथम गुजराती फिल्म में गीत गाए। श्री सुरेश अमीन ने जगजीत सिंह के करिअर बनाने में बड़ा योगदान दिया। सुरेश की मृत्यु के बाद उन्होने सुरेश को समर्पित ÷चिट्ठी ना कोई संदेश गज़ल गायी। शिक्षाः जगजीत सिंह ने 2 साल तक छगनलाल शर्मा से संगीत सीखा। इसके बाद 6 साल पक इन्होंने खयाल, ठुमरी, ध्रपुद व भारतीस संगीत में शिक्षा प्राप्त की। शिक्षा के लिए ये गंगानगर से जलांधर और फिर कुरुक्षेत्र चले गए। जलांधर के डी. ए. वी. कॉलेज से स्नातक तक की शिक्षा प्राप्त की और कुरुक्षेत्र विश्वविघालय से इतिहास में ए.म की। गज़ल एलबमः मील का पत्थर, ए. मेरे दिल, मिर्जा गालिब, आदमी, खोज, अपनी पंसद, सिलसिले, जजबात, इन्ताह, चेहरा, आइना, दिल कही होश कही, शहर इनकी प्रमुख एलबम हैं। इसके अलावा जगजीत सिंह ने कई भजन व गुरबानी गायी।फिल्मी करिअरः उन्होने प्रेम गीत, आशियाना, दुशमन, सरफरोश, तुम बिन, तरकीब, बाबुल आदि फिल्मों में गजले गाई।2003 में इन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया साथ ही साथ भारत सरकार ने संगीत के लिए उन्हें तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित किया। जगजीत सिंह ने अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा लिखी कविताओं को भी गज़ल के माध्यम से गाया। वह ऐसे पहले भारतीय संगीतकार है जिन्होंने भारतीय संगीत के इतिहास में पहली बार डिजिटल मल्टी ट्रैक रिकाडिंग का उपयोग किया। उन्हे इस समय का सबसे सफल गज़ल गायक माना जाता हैं।

Wednesday, October 14, 2009

र्मिच-मसाला के रंग


कविता और चेतन के संग
संगीत के सरताज पंचम दा


आर.डी. बर्मन का जन्म 27 जून 1939 को कोलकाता में हुआ। आर.डी. बर्मन को आमतौर पर पंचमदा नाम से भी जाना जाता है। वह गायक और बालीवुड संगीतकार सचिन देव बर्मन के एक लोते बेटे है। उनकी माता मीरा देवी को संगीत की देवी माना जाता है। बर्मन ने लगभग 18 फिल्मों में पार्श्व गायन किया है। उन्होने संगीत के साथ-साथ अभिनय भी किया। बर्मन ने संगीत की शिक्षा उस्ताद अली अकबर खान से प्राप्त की थी। पंचम दा की शादी 1966 में गीता पटेल से हुई और 1971 में तालाक हो गया था और फिर पंचम दा ने आशा भौसले से शादी की। रचनाएं: 9 साल की उम्र मे एक गीत की रचना की ÷ए मेरी टोपी पलट के आ÷ एक धुन की रचना की ÷सर जो मेरा चकराए÷ बचपन में है ÷अपना दिल तो दीवाना÷ गीत गाया।करियरः पंचम दा ने पिता की सहायता से करियर की शुरुवात की। उन्हाने लगभग 331 फिल्मो में संगीत दिया है। जिसमें 292 हिन्दी फिल्में, 3 तेलगू फिल्में, 2 मराठी फिल्में है। आर.डी. बर्मन ने हिन्दी व मराठी 5 धारावाहिक भी बनाए है। उन्होने 1959 में चलती का नाम गाड़ी, कागज के फूल व प्यासा फिल्मों में संगीत दिया। 1960 से 1970 तक की फिल्में: पंचम दा ने इस दौरान छोटे नवाव, बंदनी, तीन देविया, गाइड, भूत बंगला, तीसरा कौन, चंदन का पलना, तलाश और पड़ोसन फिल्में की। 1970 में आर डी. बर्मन 70 के दशक में प्रसिद्व संगीतकार रहे। उन्होने कंटी पंतग, अमर प्रेम, बुड़ा मिल गया, कारवां और हरे राम हरे कृष्णा, शोले, दीवार, आंधी, खुशबु, धरम कर्म, पिया तू अब तो आजा, मोनिका ओ माए डार्लिंग, आती रहेगी बहारे और कसमे वादे, आने वाला पल प्रमुख गीत रहे। 1980 से 2000 में सत्ते पे सत्ता, तीसरी कसम, राम लखन, 1942 लव स्टोरी जैसी फिल्में की और इन्होने गुलजार व आशा भौंसले के गीतो में संगीत दिया।

Friday, October 9, 2009

र्मिच-मसाला


कविता और चेतन के संग
एक महान गायक मुकेश कुमार
मुकेश कुमार चंद का जन्म 22 जुलाई 1923 पंजाब छोटे मघ्य वर्गीय परिवार में हुआ। मुकेश बालीवुड के एक प्ले बेक संगीतकार माने जाते थे। मुकेश ने बालीवुड के महान संगीतकार मोहम्मद रफी और किशोर कुमार के साथ किया और उन्होने सन्‌ 1950 से सन्‌1970 के दशक में भारतीय प्ले बेक संगीतकार के रूप में प्रसिद्व हुए।
व्यक्तिगत जीवन और शिक्षा
संगीतकार मुकेश कुमार पंजाब में पैदा हुए उनके पिता लाला जोरावर चंद्र माथुर इंजिनियर थे। उनकी माता चांद रानी पुत्र के प्रति बेहद लगाव था। वह दस बच्चो के परिवार में छटे नः के थे। संगीत श़्िाक्षक मुकेश की बहन संदर प्यारी को संगीत की शिक्षा देने आया करते थे। संगीत को ध्यान से सुनना और धुन में मगन होना उनकी आदत बन गई। उन्होने मैटिक तक शिक्षा ग्रहण करके स्कूल त्याग दिया। रोजगार के दौरान उन्होने अपनी आवाज की रिकांिडर्ंग करवाई और धीरे-धीरे गायन क्षमता को भी बढाया।
विवाह
मुकेश ने 1946 में कांदिवली में एक मंदिर में सरला त्रिवेदी से शादी की। सरला त्रिवेदी एक गुजराती ब्राह्मण परिवार से थी व एक करोड़पति बाप की बेटी थी। उस समय मुकेश के पास अपना कोई घर नहीं था और उनकी कोई निश्चित आय भी नहीं थी। 22 जुलाई 1976 को उन्होंने अपनी 30वीं सालगिरह मनाई। रीता, नलिनी, नितिन और नम्रता उनके बच्चे थे। वह वर्तमान में बॉलीवुड के अभिनेता नील नितिन मुकेश के दादा है।
करिअर
मुकेश की आवाज को मोती द्वारा सुना गया था और उन्होंने उसे पहला मौका दिया था। मोती उस समय के प्रसिद्ध अभिनेता थे और मुकेश के दूर के रिश्तेदार थे। उन्होंने पहली बार मुकेश की आवाज को तब सुना था जब पहली बार मुकेश ने पहली बार अपनी बहन की शादी में गीत गाया था। इसे सुनकर वे उसे अपने साथ मुंबई्र ले गए थे। वहां मुकेश ने जगन्नाथ से अपने संगीत की शिक्षा ली थी। इसी दौरान उन्हें फिल्मों में काम करने का मौका मिला और अपना पहला गीत 1941 में दिल ही बुक्षा हुआ हो गीत गाया था।
उन्होंने प्लेबैक सिंगर के रूप में पहला ब्रेक 1945 में मोतीलाल की फिल्म में मिला जिसमें संगीत अनिल बिस्वास ने दिया।
मुकेश के0 एल सहगल के एक बड़े प्रशंसक थे। वह के0 एल सहगल को अपना आइडल मानते है। जब के0 एल सहगल ने मुकेश का दिल जलता है तो जलने दे गीत सुना तो उन्हें यह गीत बहुत अच्छा लगा।
1950 में राजकपूर कर फिल्मों में गीत गाए। राजकपूर उस समय अभिनेता व निर्देशक थे।
1954 में अनाडी फिल्म का गीत ÷सब कुछ सीखा हमने' गीत गाया जो हीट रहा।
1961 में ÷हाथो पे सच्चाई' गीत गाया और जिस देश देश में गंगा बहती है फिल्म के गीत गाए।
1964 में संगम फिल्म का दोस्त-दोस्त ना रहा गीत गाया।
1967 में मिलन फिल्म का ÷सावन का महीना÷ गीत गाया
1970में पहचान फिल्म और 1972 में ईमान के गीत गाए।
1972 मे ही फिल्म शोर का ÷एक प्यार का नगमा' गीत गया।
1974 में मुकेश सवश्रेष्ठ गीतकार रहे मुकेश ने फिल्म रजनीगंधा में गाना गाया।
1976 में कभी-कभी फिल्म का ÷मै पल दो पल का शयर हूँ' और धरम करम का ÷एक दिन मिट जाएंगे माटी के मोर' गीत गाए
1978 में मुकेश के गीतो को और पसंद किया जाने लगा इस वर्ष उन्हाने फिल्म आहूति, परमात्मा, तुम्हारी कसम और सत्यम शिवम्‌ सुन्दरम जैसी फिल्मे की।
1980 के दशक में मुकेश की आवाज को शैतान मुजरिम और प्रेमिका मे गीत गाए
मृत्यु
मुकेश की मृत्यु 27 अगस्त 1976 को अमेरिका में दिल का दौरा पड़ने से हुई थी। जब उनके शरीर को भारत लाया गया था तो उसका भव्य स्वागत किया गया था। इस रस्म में लता मंगेशकर, राजकपूर व फिल्म जगत की कई अन्य मशहूर हस्तियों ने भी भाग लिया था और अपनी श्रद्धांजली दी थी। राजकपूर ने कहा था कि मुकेश के जाने के बाद तो मेरी आवाज ही खो गई है क्योंकि उनकी अधिकतर फिल्मों में इन्होंने ही अपनी आवाज दी थी। इनके गानों की वजह से ही उनकी अधिकतर फिल्में हिट हुई थी। यह सब उनके गीतों की सफलता का ही प्रमाण है।

Thursday, October 8, 2009

मिर्च-मसाला

कविता और चेतन के संग
मशहूर गायक सोनू निगम के बारे में कुछ जानकारी

सोनू हरियाणा के पुत्र हैं। उनका का जन्म 30 जुलाई 1973 में फरीदाबाद जिले में हुआ। वह भारतीय सिनेमा के बेहतरीन पाशर्व गायको में से एक है। यह हिन्दी, तेलगू, और कन्नड फिल्मों में अपनी आवाज के जादू को बिखेरा है। उन्होनें असंखया भारतीय व पॉप एलबम और हिन्दी फिल्मों में अभिनय किया है। सोनू भी ज्योतिष को मानते है उन्होने अपने नाम की अंतिम नाम कर वर्तनी बदलकर निगामा से निगम किया।
सोनू निगम ने तीन साल की उम्र में गायन शुरु किया। उन्होने पहली बार स्टेज पर अपने पिता के साथ मिलकर मोहम्मद रफी का गाना। ÷क्या हुआ तेरा वादा÷ गीत गाया। उसके बाद से सोनू अपने पिता के साथ मिलकर शादियों और पार्टियों में गाना गाने लगे। अपनी किशोर अवस्था में सोनू निगम ने कई प्रतियोगिताओं में भाग लिया। फिर वह अपने पिता के साथ मुम्बई चले गए और 19 वर्ष की आयु में बालीवुड में अपना करिअर शुरु किया।
शुरुवात में उन्होने अपनी गायिका में मोहम्मद रफी में गीतों को शामिल किया और टी-सीरिज की मदद से रफी कर यादें नामक एलबम निकाली। टी-सीरिज की मदद से सोनू का करिअर बना।
परदे के पीछे के गायेकार के रुप में पहली फिल्म 1990 में आई। जिसे आधिकारी तौर पर जारी नहीं किया गया। लोकप्रिय टी0 वी0 प्रोग्राम सा, रे, गा, मा, पा के आने के बाद उनमें करियर में नया मोड़ आया।
1995 में उनकी एलबम बेवफा सनम में आई ÷अच्छा सीला÷ गीत गया।
1997 में अनु मल्लिक के संगीत निर्देशन में बार्डर फिल्म का संदेशे आते है गाया। परदेस में ÷ये दिल दीवाना÷ गीत गाया।
2008 में उन्होंने युवराज, रब ने बना दी जोड़ी में गीत गाए।
सोनू की कोई भाषाओं जैसे भोजपुरी, अंग्रेजी, उडिया, नेपाली, कन्नड, पंजाबी, बंगाली, तेलगू, तमिल और मराठी का ज्ञान है।

पाप एलबम और संगीत
सोनू निगम ने कई एलबमो में काम किया है चाहे वो हिन्दी हो या पंजाबी इसके साथ-साथ उन्हाने कई भक्ति गीत भी गाए है। उन्हे ज्यादातर मोहम्मद रफी के गीतो के लिए जाना जाता है। उन्होने शुरुआती दिनो में ÷ रफी की यादे' नाम की एलबम निकाली। उन्होने सितम्बर 2007 में 6 डिस्क संग्रह किया जिसमें उनके लगभग 100 हीट गीत शामिल है। 2008 में उन्होने एलबम की तरफ रुख करते हुए ÷पंजाबी प्लीज÷ में काम किया है। पिछले वर्षो में सोनू निगम ने अपना संगीत प्रदर्शन सयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, बेल्जीयम, हालैण्ड, स्पेन, आदि देशो में वो स्टेज शो कर चुके है। मई 2007 में उन्होने नार्थ अमेरिका में एक शो का आयोजन भी किया गया। इसमे आशा भोंसले, कुणाल गांजेवाला और कैलाश खैर ने भाग लिया। सितम्बर-अक्टूबर में उन्होने कनाडा और जर्मनी में शो किए। अप्रैल 2008 में उन्होने भारत के विभिन्न शहरो का दौरा किया और मैराथन को बढावा देने के लिए भी कार्य किए। सोनू निगम ने हार्वड यूनिवर्सिटी में महात्मा गांधी को सम्प्रित भजन गाए। वर्तमान में वह सुनिधि चौहान के साथ अमेरिका की यात्रा पर है और उनके टूर का नाम ÷दा एक्सपलोजन 2009' है।
टेलीविजन और रेडियो
सोनू निगम ने सारेगामापा और किसमे कितना है दम टीवी शो के होस्ट रह चुके है। साथ ही साथ उन्होने अमूल स्टार वाइस आफॅ इंडिया में जज की भूमिका निभाई है।
सोनू निगम ने अपने ही नाम पर एक रेडियो शो भी किया जिसका नाम 'लाईफ की धून सोनू के संग' जिसका प्रसारण रेडियो 91.1 अफम पे हुआ। इसमें साथ-साथ इनके लता मंगेशकर के साथ कई रेडियो इण्टरवियू आ चुके हैं।
सोनू की भविष्य की योजनाएं
संगीतकार सोनू निगम की अंगेजी एलम्ब रिलीज होने वाली है जिसका नाम सीप्रीट आन पोलडिग और साथ ही साथ वह अपनी नई फिल्म आंखो ही आंखो में अभिनय करते हुए नजर आएंगे।

व्यक्तिगत जीवन
सोनू निगम के पिता अगम कुमार है वह एक संगीतकार और उनकी माता का नाम शोभा निगम है। मिनल और निकिता इनकी दो बहने है। सोनू निगम माता पिता के प्यारे है उनकी रूची पिता के व्यवसाय को देखकर संगीत में बनी और उनके माता पिता भी अच्छे संगीतकार है उन्होने सन 2005 में बेवफाई एलबम बाजार में उतार कर संगीत की दुनिया में पहला कदम रखा। इसके साथ ही इनकी दोनो बहनो ने भी संगीत की दुनियां में पैठ बनाई। 15फरवरी 2002 सन में मघुरिमा नामक लडकी से शादी के बंघन में बध गए