
कविता और चेतन के संग
एक महान गायक मुकेश कुमार
मुकेश कुमार चंद का जन्म 22 जुलाई 1923 पंजाब छोटे मघ्य वर्गीय परिवार में हुआ। मुकेश बालीवुड के एक प्ले बेक संगीतकार माने जाते थे। मुकेश ने बालीवुड के महान संगीतकार मोहम्मद रफी और किशोर कुमार के साथ किया और उन्होने सन् 1950 से सन्1970 के दशक में भारतीय प्ले बेक संगीतकार के रूप में प्रसिद्व हुए।
व्यक्तिगत जीवन और शिक्षा
संगीतकार मुकेश कुमार पंजाब में पैदा हुए उनके पिता लाला जोरावर चंद्र माथुर इंजिनियर थे। उनकी माता चांद रानी पुत्र के प्रति बेहद लगाव था। वह दस बच्चो के परिवार में छटे नः के थे। संगीत श़्िाक्षक मुकेश की बहन संदर प्यारी को संगीत की शिक्षा देने आया करते थे। संगीत को ध्यान से सुनना और धुन में मगन होना उनकी आदत बन गई। उन्होने मैटिक तक शिक्षा ग्रहण करके स्कूल त्याग दिया। रोजगार के दौरान उन्होने अपनी आवाज की रिकांिडर्ंग करवाई और धीरे-धीरे गायन क्षमता को भी बढाया।
विवाह
मुकेश ने 1946 में कांदिवली में एक मंदिर में सरला त्रिवेदी से शादी की। सरला त्रिवेदी एक गुजराती ब्राह्मण परिवार से थी व एक करोड़पति बाप की बेटी थी। उस समय मुकेश के पास अपना कोई घर नहीं था और उनकी कोई निश्चित आय भी नहीं थी। 22 जुलाई 1976 को उन्होंने अपनी 30वीं सालगिरह मनाई। रीता, नलिनी, नितिन और नम्रता उनके बच्चे थे। वह वर्तमान में बॉलीवुड के अभिनेता नील नितिन मुकेश के दादा है।
करिअर
मुकेश की आवाज को मोती द्वारा सुना गया था और उन्होंने उसे पहला मौका दिया था। मोती उस समय के प्रसिद्ध अभिनेता थे और मुकेश के दूर के रिश्तेदार थे। उन्होंने पहली बार मुकेश की आवाज को तब सुना था जब पहली बार मुकेश ने पहली बार अपनी बहन की शादी में गीत गाया था। इसे सुनकर वे उसे अपने साथ मुंबई्र ले गए थे। वहां मुकेश ने जगन्नाथ से अपने संगीत की शिक्षा ली थी। इसी दौरान उन्हें फिल्मों में काम करने का मौका मिला और अपना पहला गीत 1941 में दिल ही बुक्षा हुआ हो गीत गाया था।
उन्होंने प्लेबैक सिंगर के रूप में पहला ब्रेक 1945 में मोतीलाल की फिल्म में मिला जिसमें संगीत अनिल बिस्वास ने दिया।
मुकेश के0 एल सहगल के एक बड़े प्रशंसक थे। वह के0 एल सहगल को अपना आइडल मानते है। जब के0 एल सहगल ने मुकेश का दिल जलता है तो जलने दे गीत सुना तो उन्हें यह गीत बहुत अच्छा लगा।
1950 में राजकपूर कर फिल्मों में गीत गाए। राजकपूर उस समय अभिनेता व निर्देशक थे।
1954 में अनाडी फिल्म का गीत ÷सब कुछ सीखा हमने' गीत गाया जो हीट रहा।
1961 में ÷हाथो पे सच्चाई' गीत गाया और जिस देश देश में गंगा बहती है फिल्म के गीत गाए।
1964 में संगम फिल्म का दोस्त-दोस्त ना रहा गीत गाया।
1967 में मिलन फिल्म का ÷सावन का महीना÷ गीत गाया
1970में पहचान फिल्म और 1972 में ईमान के गीत गाए।
1972 मे ही फिल्म शोर का ÷एक प्यार का नगमा' गीत गया।
1974 में मुकेश सवश्रेष्ठ गीतकार रहे मुकेश ने फिल्म रजनीगंधा में गाना गाया।
1976 में कभी-कभी फिल्म का ÷मै पल दो पल का शयर हूँ' और धरम करम का ÷एक दिन मिट जाएंगे माटी के मोर' गीत गाए
1978 में मुकेश के गीतो को और पसंद किया जाने लगा इस वर्ष उन्हाने फिल्म आहूति, परमात्मा, तुम्हारी कसम और सत्यम शिवम् सुन्दरम जैसी फिल्मे की।
1980 के दशक में मुकेश की आवाज को शैतान मुजरिम और प्रेमिका मे गीत गाए
मृत्यु
मुकेश की मृत्यु 27 अगस्त 1976 को अमेरिका में दिल का दौरा पड़ने से हुई थी। जब उनके शरीर को भारत लाया गया था तो उसका भव्य स्वागत किया गया था। इस रस्म में लता मंगेशकर, राजकपूर व फिल्म जगत की कई अन्य मशहूर हस्तियों ने भी भाग लिया था और अपनी श्रद्धांजली दी थी। राजकपूर ने कहा था कि मुकेश के जाने के बाद तो मेरी आवाज ही खो गई है क्योंकि उनकी अधिकतर फिल्मों में इन्होंने ही अपनी आवाज दी थी। इनके गानों की वजह से ही उनकी अधिकतर फिल्में हिट हुई थी। यह सब उनके गीतों की सफलता का ही प्रमाण है।
एक महान गायक मुकेश कुमार
मुकेश कुमार चंद का जन्म 22 जुलाई 1923 पंजाब छोटे मघ्य वर्गीय परिवार में हुआ। मुकेश बालीवुड के एक प्ले बेक संगीतकार माने जाते थे। मुकेश ने बालीवुड के महान संगीतकार मोहम्मद रफी और किशोर कुमार के साथ किया और उन्होने सन् 1950 से सन्1970 के दशक में भारतीय प्ले बेक संगीतकार के रूप में प्रसिद्व हुए।
व्यक्तिगत जीवन और शिक्षा
संगीतकार मुकेश कुमार पंजाब में पैदा हुए उनके पिता लाला जोरावर चंद्र माथुर इंजिनियर थे। उनकी माता चांद रानी पुत्र के प्रति बेहद लगाव था। वह दस बच्चो के परिवार में छटे नः के थे। संगीत श़्िाक्षक मुकेश की बहन संदर प्यारी को संगीत की शिक्षा देने आया करते थे। संगीत को ध्यान से सुनना और धुन में मगन होना उनकी आदत बन गई। उन्होने मैटिक तक शिक्षा ग्रहण करके स्कूल त्याग दिया। रोजगार के दौरान उन्होने अपनी आवाज की रिकांिडर्ंग करवाई और धीरे-धीरे गायन क्षमता को भी बढाया।
विवाह
मुकेश ने 1946 में कांदिवली में एक मंदिर में सरला त्रिवेदी से शादी की। सरला त्रिवेदी एक गुजराती ब्राह्मण परिवार से थी व एक करोड़पति बाप की बेटी थी। उस समय मुकेश के पास अपना कोई घर नहीं था और उनकी कोई निश्चित आय भी नहीं थी। 22 जुलाई 1976 को उन्होंने अपनी 30वीं सालगिरह मनाई। रीता, नलिनी, नितिन और नम्रता उनके बच्चे थे। वह वर्तमान में बॉलीवुड के अभिनेता नील नितिन मुकेश के दादा है।
करिअर
मुकेश की आवाज को मोती द्वारा सुना गया था और उन्होंने उसे पहला मौका दिया था। मोती उस समय के प्रसिद्ध अभिनेता थे और मुकेश के दूर के रिश्तेदार थे। उन्होंने पहली बार मुकेश की आवाज को तब सुना था जब पहली बार मुकेश ने पहली बार अपनी बहन की शादी में गीत गाया था। इसे सुनकर वे उसे अपने साथ मुंबई्र ले गए थे। वहां मुकेश ने जगन्नाथ से अपने संगीत की शिक्षा ली थी। इसी दौरान उन्हें फिल्मों में काम करने का मौका मिला और अपना पहला गीत 1941 में दिल ही बुक्षा हुआ हो गीत गाया था।
उन्होंने प्लेबैक सिंगर के रूप में पहला ब्रेक 1945 में मोतीलाल की फिल्म में मिला जिसमें संगीत अनिल बिस्वास ने दिया।
मुकेश के0 एल सहगल के एक बड़े प्रशंसक थे। वह के0 एल सहगल को अपना आइडल मानते है। जब के0 एल सहगल ने मुकेश का दिल जलता है तो जलने दे गीत सुना तो उन्हें यह गीत बहुत अच्छा लगा।
1950 में राजकपूर कर फिल्मों में गीत गाए। राजकपूर उस समय अभिनेता व निर्देशक थे।
1954 में अनाडी फिल्म का गीत ÷सब कुछ सीखा हमने' गीत गाया जो हीट रहा।
1961 में ÷हाथो पे सच्चाई' गीत गाया और जिस देश देश में गंगा बहती है फिल्म के गीत गाए।
1964 में संगम फिल्म का दोस्त-दोस्त ना रहा गीत गाया।
1967 में मिलन फिल्म का ÷सावन का महीना÷ गीत गाया
1970में पहचान फिल्म और 1972 में ईमान के गीत गाए।
1972 मे ही फिल्म शोर का ÷एक प्यार का नगमा' गीत गया।
1974 में मुकेश सवश्रेष्ठ गीतकार रहे मुकेश ने फिल्म रजनीगंधा में गाना गाया।
1976 में कभी-कभी फिल्म का ÷मै पल दो पल का शयर हूँ' और धरम करम का ÷एक दिन मिट जाएंगे माटी के मोर' गीत गाए
1978 में मुकेश के गीतो को और पसंद किया जाने लगा इस वर्ष उन्हाने फिल्म आहूति, परमात्मा, तुम्हारी कसम और सत्यम शिवम् सुन्दरम जैसी फिल्मे की।
1980 के दशक में मुकेश की आवाज को शैतान मुजरिम और प्रेमिका मे गीत गाए
मृत्यु
मुकेश की मृत्यु 27 अगस्त 1976 को अमेरिका में दिल का दौरा पड़ने से हुई थी। जब उनके शरीर को भारत लाया गया था तो उसका भव्य स्वागत किया गया था। इस रस्म में लता मंगेशकर, राजकपूर व फिल्म जगत की कई अन्य मशहूर हस्तियों ने भी भाग लिया था और अपनी श्रद्धांजली दी थी। राजकपूर ने कहा था कि मुकेश के जाने के बाद तो मेरी आवाज ही खो गई है क्योंकि उनकी अधिकतर फिल्मों में इन्होंने ही अपनी आवाज दी थी। इनके गानों की वजह से ही उनकी अधिकतर फिल्में हिट हुई थी। यह सब उनके गीतों की सफलता का ही प्रमाण है।
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