
कविता जिंदल और चेतन के संग
सफल गज़ल गायक जगजीत
सिंहजगजीत सिंह का जन्म 8 फरवरी 1941 को राजस्थान के गंगानगर जिले में हुआ। इनके पिता का अमर सिंह और माता का नाम बच्चन कौर हैं। वह अपने परिवार में जीत के नाम से जाने जाते हैं। गज़ल गायक ने शुरुवाती दौर में अपनी पत्नी चित्रा सिंह के साथ गज़ले गई। जगजीत सिंह को पंजाबी, हिन्दी, उर्दू, बंगाली, गुजराती और नेपाली भाषाओं में गजलें गायी। जगजीत सिंह ने सर्वप्रथम गुजराती फिल्म में गीत गाए। श्री सुरेश अमीन ने जगजीत सिंह के करिअर बनाने में बड़ा योगदान दिया। सुरेश की मृत्यु के बाद उन्होने सुरेश को समर्पित ÷चिट्ठी ना कोई संदेश गज़ल गायी। शिक्षाः जगजीत सिंह ने 2 साल तक छगनलाल शर्मा से संगीत सीखा। इसके बाद 6 साल पक इन्होंने खयाल, ठुमरी, ध्रपुद व भारतीस संगीत में शिक्षा प्राप्त की। शिक्षा के लिए ये गंगानगर से जलांधर और फिर कुरुक्षेत्र चले गए। जलांधर के डी. ए. वी. कॉलेज से स्नातक तक की शिक्षा प्राप्त की और कुरुक्षेत्र विश्वविघालय से इतिहास में ए.म की। गज़ल एलबमः मील का पत्थर, ए. मेरे दिल, मिर्जा गालिब, आदमी, खोज, अपनी पंसद, सिलसिले, जजबात, इन्ताह, चेहरा, आइना, दिल कही होश कही, शहर इनकी प्रमुख एलबम हैं। इसके अलावा जगजीत सिंह ने कई भजन व गुरबानी गायी।फिल्मी करिअरः उन्होने प्रेम गीत, आशियाना, दुशमन, सरफरोश, तुम बिन, तरकीब, बाबुल आदि फिल्मों में गजले गाई।2003 में इन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया साथ ही साथ भारत सरकार ने संगीत के लिए उन्हें तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित किया। जगजीत सिंह ने अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा लिखी कविताओं को भी गज़ल के माध्यम से गाया। वह ऐसे पहले भारतीय संगीतकार है जिन्होंने भारतीय संगीत के इतिहास में पहली बार डिजिटल मल्टी ट्रैक रिकाडिंग का उपयोग किया। उन्हे इस समय का सबसे सफल गज़ल गायक माना जाता हैं। कविता जिंदल और चेतन के संग सफल गज़ल गायक जगजीत सिंहजगजीत सिंह का जन्म 8 फरवरी 1941 को राजस्थान के गंगानगर जिले में हुआ। इनके पिता का अमर सिंह और माता का नाम बच्चन कौर हैं। वह अपने परिवार में जीत के नाम से जाने जाते हैं। गज़ल गायक ने शुरुवाती दौर में अपनी पत्नी चित्रा सिंह के साथ गज़ले गई। जगजीत सिंह को पंजाबी, हिन्दी, उर्दू, बंगाली, गुजराती और नेपाली भाषाओं में गजलें गायी। जगजीत सिंह ने सर्वप्रथम गुजराती फिल्म में गीत गाए। श्री सुरेश अमीन ने जगजीत सिंह के करिअर बनाने में बड़ा योगदान दिया। सुरेश की मृत्यु के बाद उन्होने सुरेश को समर्पित ÷चिट्ठी ना कोई संदेश गज़ल गायी। शिक्षाः जगजीत सिंह ने 2 साल तक छगनलाल शर्मा से संगीत सीखा। इसके बाद 6 साल पक इन्होंने खयाल, ठुमरी, ध्रपुद व भारतीस संगीत में शिक्षा प्राप्त की। शिक्षा के लिए ये गंगानगर से जलांधर और फिर कुरुक्षेत्र चले गए। जलांधर के डी. ए. वी. कॉलेज से स्नातक तक की शिक्षा प्राप्त की और कुरुक्षेत्र विश्वविघालय से इतिहास में ए.म की। गज़ल एलबमः मील का पत्थर, ए. मेरे दिल, मिर्जा गालिब, आदमी, खोज, अपनी पंसद, सिलसिले, जजबात, इन्ताह, चेहरा, आइना, दिल कही होश कही, शहर इनकी प्रमुख एलबम हैं। इसके अलावा जगजीत सिंह ने कई भजन व गुरबानी गायी।फिल्मी करिअरः उन्होने प्रेम गीत, आशियाना, दुशमन, सरफरोश, तुम बिन, तरकीब, बाबुल आदि फिल्मों में गजले गाई।2003 में इन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया साथ ही साथ भारत सरकार ने संगीत के लिए उन्हें तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित किया। जगजीत सिंह ने अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा लिखी कविताओं को भी गज़ल के माध्यम से गाया। वह ऐसे पहले भारतीय संगीतकार है जिन्होंने भारतीय संगीत के इतिहास में पहली बार डिजिटल मल्टी ट्रैक रिकाडिंग का उपयोग किया। उन्हे इस समय का सबसे सफल गज़ल गायक माना जाता हैं।

